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84 वर्ष में उम्र में असरानी का निधन, सेंट जेवियर स्कूल जयपुर में पढ़े थे
1975 में आई फिल्म शोले के डायलॉग हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं से फेमस हुए थे असरानी
जयपुर।
'हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं, हमारे जाने बिना यहां कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता' फिल्म शोले में इस डायलॉग से मशहूर हुए फिल्म एक्टर असरानी हमारे बीच नहीं रहे। वे जयपुर के रहने वाले थे। पूरा नाम गोवर्धन असरानी था। गोर्वधन असरानी जयपुर में पढ़ाई के बाद सबको हंसाने मुम्बई की फिल्मी दुनिया में चले गए थे । करीब साढ़े तीन सौ फिल्मों में कामेडियन बने असरानी का जन्म सिन्ध में एक जनवरी सन् 1941 को ठाकुरदास जेठानंद असरानी के यहां हुआ। असरानी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 20 अक्टूबर को दोपहर लगभग 3.30 बजे उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है।"
भारत पाक विभाजन के समय असरानी का परिवार जयपुर में बस गया था। न्यू कॉलोनी की सिंधी पंचायत स्कूल में प्राइमरी शिक्षा ग्रहण की। समाजसेवी बिशनदास संगतानी जैसे कई लोग असरानी के साथ स्कूलों में पढ़े। जयपुर में ही सेंट जेवियर स्कूल में भी पढ़े। पंद्रह साल की आयु के असरानी सन् 1955 में जयपुर आकाशवाणी केन्द्र में पहुंचे और वहां 'मन डोले, मेरा तन डोले' गाने की थीम के वाइस टेस्ट में पास हो गए। रेडियो पर बच्चों के लिए असरानी चौंच के नाम से एक कार्यक्रम प्रस्तुत करते रहे। उस समय डीएन शैली, माया इसरानी, गंगा प्रसाद माथुर का इन्हें पूरा सहयोग मिला। रेडियो से एक कार्यक्रम पर पांच रुपये मिलते थे। पिता के साथ व्यवसाय करने के बजाय थियेटर आर्टिस्ट बनने में ही असरानी की लगन बनी रही । जयपुर में बीए करने के बाद फिल्मों में एक्टिंग करने का मंसूबा लेकर सन् 1962 में मुम्बई पहुंचे और वहां आकाशवाणी से जुड़ गए। पुणे के फिल्म इंस्टीच्यू में दो साल तक का प्रशिक्षण लेने के बाद 1966 में छोटी फिल्म 'हम कहां जा रहे हैं' में कॉलेज स्टूडेंट की भूमिका निभाई ।
फिल्मों में काम प्राप्त करने के लिए असरानी करीब पांच साल तक मुम्बई में भटकते रहे लेकिन हार नहीं मानी।
इस दौरान असरानी ने 'कांच की चूड़ियां' में विश्वजीत के दोस्त त्रिपाठी की भूमिका निभाई। फिल्म इन्स्टीटयूर पुणे में नौकरी करने के दौरान सन् 1971 में 'गुड्डी' फिल्म में अच्छा प्रदर्शन किया तब इन्हें एक साथ आठ फिल्मों में काम मिल गया। फिल्म 'कोशिश' में खलनायक की भूमिका निभाई। इसके बाद सभी ने हांस्य कलाकार का रोल ही करने की सलाह दी। इस दौरान सन् 1973 में अभिनेत्री मंजू बंसल से विवाह किया। सन् 1975 में 'शोले' फिल्म में इनके किरदार की तारीफ हुई। दूरदर्शन पर 'नटखट नारद' की भूमिका में भी असरानी थे।
साभार: जितेंद्र सिंह शेखावत (वरिष्ठ पत्रकार)
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