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अद्वितीय RPS अफसर: होटल -डिस्को-क्लब-बार वाले इलाके से ‘मोहल्ले’ में ट्रांसफर हुआ तो पुरानी कुर्सी से चिपका
राजस्थान में पुलिसगिरी नहीं, अब करना पड़ेगा वास्तव में काम
जयपुर।
पिंकसिटी में सिंघम बनकर घूमने वाले एक आरपीएस अफसर का तबादला 'भाईजान के इलाके में हो गया तो हवा निकल गई। कद-काठी, बॉडी-शॉडी देखकर पुलिस मुख्यालय ने उसे भाईजान वाले इलाके में लगा दिया था। सिंघम कांप गया। होटल, क्लब-डिस्को, बार की भरमार वाले इलाके में तीन साल हो गए थे। सुबह शाम रील बनवाते, फोटो खिंचवाते मौज करते दिन कट रहे थे। ज्योंहि पुलिस हेडक्वार्टर ने 'भाईजान' वाले इलाके में पोस्टिंग की तो सिंघम की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। वहां ज्वाइन कर काबिलियत दिखाने की बजाय अफसरों से सैटिंग कर ली। अब अफसर भी उसे रिलीव नहीं कर रहे, जबकि इस सिंघम के पास ना कोई खास काम बचा है ना कोई विशेष उपलब्धि है। हैरत की बात यह है कि पुलिस मुख्यालय भी चुप है, वरना ऐसे को तो धक्का देकर ऑफिस से बाहर निकाल देना चाहिए। उसके चक्कर में दो दूसरे एसीपी भी ज्वाइन नहीं कर पा रहे हैं। बाकी के अफसर DGP साहब का मुंह ताक रहे हैं।
पुलिसगिरी नहीं अब करना पड़ेगा वास्तव में काम
राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने पिछले माह 180 पुलिस उपाधीक्षकों की तबादला सूची जारी की थी। इसमें जयपुर में भी आठ एसीपी बदले थे। इस तबादला सूची के बाद जयपुर में अधिकतर ने या तो नए पद पर ज्वाइन कर लिया, या फिर रिलीव हो गए। व्यक्तिगत काम से ज्वाइनिंग में एक दो दिन की देरी है। एक कथित सिंघम की वजह से दो अन्य एसीपी की ज्वाइनिंग अटकी हुई है। इस सिंघम को जहां लगाया है, यह वहां जाना नहीं चाह रहा। लगता है 'भाईजान' के इलाके से डर गए। वरना अभी जिस इलाके में पोस्टेड हैं, वहां ताे बड़ी 'सिंघमगिरी' झाड़ते फिरते हैं। असल में वजह है कि जिस इलाके में पोस्टेड हैं, वहां पढ़े-लिखे,समझदार और काननू से डरने वाले लोग ज्यादा रहते हैं, तीन साल इन पर सिंघम ने खूब ‘पुलिसगिरी’ झाड़ी, अब जहां ट्रांसफर हुआ हैं, वहां ‘वास्तव’ में पुलिसिंग करनी पड़ती है।
10 दिन बीत चुके, तबादला आदेश की परवाह नहीं कर रहे अफसर
राजस्थान में पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अफसरों के तबादले की लिस्ट आए 10 दिन बीत चुके। जयपुर वाला यह सिंघम अकेला नहीं है तो अंगद पांव बना बैठा है, ऐसे कई हैं। एक दौसा से भरतपुर जाने में नखरे दिखा रही है। ऐसे में कुछ आरपीएस वहां भी अटके पड़े हैं। कुछ जिलों में आईपीएस लगे अफसर भी पुलिस मुख्यालय के फरमान को नहीं मान रहे। एक जिले में तो एसपी ने रिलीव नहीं किया तो आईजी को रिलीव करना पड़ा। अब आईजी का आदेश कैसे टालते। भरतपुर रेंज के एक जिले में चार को रिलीव नहीं किया, दूसरे जिले में दौसा में तीन को रिलीव नहीं किया, चंबल वाले जिले में एक को रिलीव नहीं किया। जयपुर रेंज में भी यही हाल है। जिनको आईजी लगाया वे बिहार चुनाव में चले गए थे। चार्ज राहुल प्रकाश के पास है, वे ज्वाइन करें तो रिलीविंग की राह खुले।
डीजीपी ने 180 का ट्रांसफर किया, असर सिर्फ 40 पर हुआ
1 नवंबर 2025 को पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के हस्ताक्षर से 180 पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों के तबादले किए गए थे। इनमें करीब 150 तो ऐसे थे जो काफी समय से एक ही जगह पाेस्टेड थे। डीजीपी के आदेश को 10 दिन बीत चुके, लेकिन पुलिस महकमें की दादागिरी देखो, अभी सिर्फ 40-50 RPS ने ही नई जगह ज्वाइन किया है। कोई खुद कुर्सी छोड़ना नहीं चाह रहा तो, किसी कमाऊ पूत को प्रभारी अधिकारी रिलीव नहीं कर रहे। सबसे ज्यादा समस्या उन्होंने खड़ी कर रखी है जिनको फील्ड पोस्टिंग की जगह फील्ड पोस्टिंग का ही प्रसाद मिल गया। ऐसे अफसर ज्यादा दादागिरी कर रहे हैं। कई जगह उनके सुपरवाईजरी अफसर अपने कमाऊ पूतों को रिलीव करने में कोई न कोई बहाना मार रहे हैं।
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