Thursday, 16 April 2026

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10 वीं मंजिल से गिरा मलबा, मजदूर की दर्दनाक मौत

जगतपुरा में बन रहा है NIMS वाले का नया अस्पताल, सुपरवाइजर और इंजीनियर मजदूर को तड़पता छोड़कर ताला लगाकर भागे

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जयपुर के जगतपुरा में दर्दनाक हादसा

जयपुर के जगतपुरा में गोनेर रोड पर NIMS अस्पताल वालों की निर्माणाधीन 10 मंजिला बिल्डिंग से गिरे शटरिंग की लकड़ियों के टुकड़े से बुधवार दोपहर एक मजदूर की मौत हो गई। बिल्डिंग निर्माण के लिए लापरवाही से लगाई जा रही शटरिंग नीचे मजदूर पर आ गिरा। मजदूर ने मौके पर ही तड़प तड़प कर दम तोड़ दिया। एंबुलेंस के इंतजार में उसकी मौके पर ही मौत हो जाने से साथी मजदूर में आक्रोश फैल गया। बाद में एंबुलेंस आई तो डेड बॉडी नहीं ले जाने दी। इसकी हादसे की सूचना जब राजगंगा टीम को मिली तो पुलिस के सीनियर ऑफिसर्स को हादसे के बारे में बताया। एसीपी सांगानेर हरिशंकर शर्मा तत्काल मौके पर पहुंचे और मजदूरों को समझाइस कर डेड बॉडी को अस्पताल के लिए रवाना करवाया।

तड़प तड़प कर दम तोड़ दिया

हादसा बुधवार 4 फरवरी दोपहर करीब 1 बजे हुआ। घटनास्थल रामनगरिया थाना इलाके में है। यहां जगतपुरा से गोनेर जाने वाली सड़क पर महिमा कोपल रेजिडेंसी के पास NIMS अस्पताल वाले का एक और नया परिसर बन रहा है। सुरक्षा मानक ताक पर रखकर इस बिल्डिंग का अंधाधुंध काम चल रहा है। जगतपुरा, सांगानेर, सीतापुरा का एरिया मेडिकल इंस्टीट्यूट्स का हब बनता जा रहा है। यहां पहले से महात्मा गांधी अस्पताल फिर बॉम्बे हॉस्पिटल और अब NIMS वाले का बड़ा अस्पताल बन रहा है।

ना जाने कितने मजदूरों की बलि

10वीं मंजिल से शटरिंग की लकडियां गिरने से मरने वाला मजदूर मानिक (19) बिहार का बताया जा रहा है। साथी मजदूरों ने पुलिस को बताया कि घायल अवस्था में वह काफी देर तड़पता रहा। उसे किसी ने अस्पताल नहीं पहुंचाया। उलटा मजदूर पर मलबा गिरने पर वर्क सुपरवाइजर और मालिक की तरफ से मौजूद अन्य लोग साइट के ऑफिस को ताला लगा कर भाग गए। घायल को अस्पताल पहुंचाया जाता तो हो सकता है बच जाता। मौके पर ठेकेदार भी नहीं था। बिना ठेकेदार और सुपरवाइजर के कैसे निर्माण काम चल रहा था, ये भी सवाल है। मजदूरों ने कॉल किया तब आधा घंटे बाद एंबुलेंस आई। तब तक मजदूर वहीं पड़ा दम तोड़ चुका था।

ऐसा अस्पताल बन भी गया तो लोगों की क्या ही जान बचाएगा

आलीशान अस्पताल बना रहे बड़े ग्रुप के मालिक मैनेजर लोग कितने असंवेदनशील होते हैं, इस हादसे के मौके पर दिखा। यहां निर्माण स्थल पर सुरक्षा और जान बचाने का कोई संसाधन नहीं थे। घायल मजदूर की जान ही लेकर माने। भविष्य में ये अस्पताल बन भी गया तो क्या खाक जान बचा पाएगा।

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