Thursday, 16 April 2026

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नन्हीं परी मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी सरकार

मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में फिर मजबूत पैरवी के लिए दिए निर्देश

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मासूम की रेप की बात हत्या कर दी गई थी (कॉन्सेप्ट फोटो)

देहरादून। वर्ष 2014 में काठगोदाम में मूल रूप से पिथौरागढ़ निवासी सात वर्षीय बच्ची नन्ही परी के साथ हुई दरिंदगी के मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। नन्हीं परी केस के आरोपी को सुप्रीम कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया।इसके बाद प्रदेशभर में उग्र आंदोलन हो रहे हैं। लोग गुस्से में है, कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर पैरवी में लापरवाही काआरोप लगाया है। मासूम बस्सी के साथ रेप और मर्डर के जघन्य वारदात से उत्तराखंड हिल गया था। आरोपी को सैशन कोर्ट और हाईकोर्ट से सजा हुई थी, लेकिन अब सुप्रीम केार्ट ने दोषमुक्त कर दिया।

इस मामले में आरोपित को सुप्रीम कोर्ट से दोषमुक्त किए जाने का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश की बेटियों के साथ दरिंदगी करने वालों को सजा दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इस मामले में आरोपित को लोअर कोर्ट और हाईकोर्ट से सजा हो चुकी थी, लेकिन अब किन्हीं कारण से सुप्रीम कोर्ट से आरोपित बरी हो चुका है। इसलिए न्याय विभाग को इस प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पुनर्विचार याचिका दाखिल करते हुए, मजबूत पैरवी के साथ सजा सुनिश्चित कराए जाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस केस को मजबूती से लड़ेगी, इसमें अच्छी से अच्छी लीगल टीम को लगाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि में इस तरह के कुकृत्य करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। न्याय की इस लड़ाई में सरकार पूरी तरह पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि ऐसे असामाजिक तत्वों की पहचान के लिए सरकार लगातार प्रदेश में सत्यापन अभियान चला रही है। सरकार देवभूमि की अस्मिता पर कोई चोट नहीं पहुंचने देगी। 20 नवंबर 2014 को कुमाऊं के प्रवेश द्वार काठगोदाम (हल्द्वानी) से पिथौरागढ़ की 6 साल की मासूम बच्ची अपने परिवार के साथ एक शादी समारोह में गई थी। जहां से वो अचानक लापता हो गई थी। काफी तलाश करने पर भी वो नहीं मिली। घटना के 6 दिन बाद बच्ची का शव गौला नदी से बरामद हुआ।

​पोस्टमॉर्टम में बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की पुष्टि हुई थी। घटना के 8 दिन बाद पुलिस ने चंडीगढ़ से आरोपी अख्तर अली को गिरफ्तार किया था। दो अन्य आरोपी प्रेमपाल और जूनियर मसीह को भी गिरफ्तार किया गया था। मार्च 2016 में हल्द्वानी की एडीजे स्पेशल कोर्ट ने आरोपी अख्तर अली को गैंगरेप एवं हत्या का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। प्रेमपाल को 5 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद ​नैनीताल हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2019 में निचली अदालत के इस फैसले को बरकरार रखा था। अब सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी अख्तर अली को बरी कर दिया गया। जिसके बाद लोगों में भारी आक्रोश है।

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