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जयपुर के आमेर थाने में दर्ज नाबालिग से रेप मामले में अहम फैसला
राजस्थान हाई कोर्ट का फैसला चर्चा में आया
जयपुर।
उच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि अदालत किसी मामले में “वास्तविक परिस्थितियों” को नजरअंदाज नहीं कर सकती। न्यायालय ने नाबालिग से रेप और पॉक्सो (POCSO) के मामले में आरोपी की एफआईआर रद्द करते हुए कहा कि जब पीड़िता बालिग हो चुकी हो, आरोपी से विवाह कर चुकी हो और स्वयं अदालत के सामने यह कहे कि वह उसके साथ खुशहाल जीवन बिता रही है, तो मुकदमे को जारी रखना उचित नहीं होगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढंढ की एकलपीठ ने दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी सभ्य समाज में कानून स्थिर नहीं होता, बल्कि समय और परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है। जस्टिस ढंढ ने कहा कि “कानून का उद्देश्य समाज का कल्याण है, न कि केवल कठोरता दिखाना।”
मामला जयपुर उत्तर के आमेर थाना क्षेत्र का
वर्ष 2021 में नाबालिग से रेप का मामला दर्ज हुआ था। आरोपी जेल में था, लेकिन अदालत ने उसे शादी के लिए अंतरिम जमानत दी। 8 मई 2025 को आरोपी को अनुमति मिली और उसने 14 मई को पीड़िता से विवाह किया। विवाह का पंजीकरण भी करवा लिया गया।
सुनवाई के दौरान पीड़िता खुद अदालत में पेश हुई और कहा कि वह आरोपी के साथ शांतिपूर्ण व खुशहाल वैवाहिक जीवन जी रही है। उसने अदालत से अनुरोध किया कि अब मामला खत्म किया जाए।
अदालत ने एफआईआर रद्द कर दी
अदालत ने कहा कि अदालत ने कहा कि इस मुकदमे को जारी रखने से दोनों के वैवाहिक जीवन पर विपरीत असर पड़ेगा। साथ ही अदालत ने साफ किया कि यह फैसला केवल इस विशेष मामले तक सीमित रहेगा और इसे भविष्य में नज़ीर के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
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