Thursday, 17 September 2026

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विदेश से MBBS तो कर आए, पर भारत में FMG परीक्षा पास नहीं कर पाए

फर्जी एफएमजी प्रमाणपत्र मामले में विदेश से एमबीबीएस करने वाले तीन डॉक्टर गिरफ्तार

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विदेश से MBBS तो कर आए, पर भारत में FMG परीक्षा पास नहीं कर पाए

विदेश से एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बाद भारत में प्रैक्टिस करने के लिए आवश्यक एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा (FMGE) पास किए बिना राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने फर्जी एफएमजी प्रमाणपत्र तैयार करवाकर इंटर्नशिप और मेडिकल रजिस्ट्रेशन हासिल करने के आरोप में तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आशीष कुमार शर्मा, राजेंद्र कुमार यादव और नरेश रोलानिया के रूप में हुई है।

मेडिकल काउंसिल में पंजीयन और इंटर्नशिप के लिए एग्जाम पास करना जरूरी

एसओजी की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, इस मामले में थाना एसओजी जयपुर में 4 फरवरी 2026 को एफआईआर संख्या 08/26 दर्ज की गई थी। जांच में सामने आया कि विदेश से मेडिकल डिग्री हासिल करने वाले कुछ लोगों ने भारत में पंजीयन से पहले अनिवार्य एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की थी। इसके बावजूद कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन और विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप हासिल की गई।

100 से अधिक आईडेंटिफाई, 30 हाे चुके गिरफ्तार

पुलिस के मुताबिक जांच के दौरान फर्जी एफएमजी प्रमाणपत्र तैयार कराने वाले 100 से अधिक लोगों की पहचान की जा चुकी है। इनमें से राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार सहित करीब 30 लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क में प्रमाणपत्र तैयार करने, उपलब्ध कराने और मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

गिरफ्तार नंबर 1.

गिरफ्तार आशीष कुमार शर्मा ने कजाकिस्तान से एमबीबीएस किया था और वर्ष 2021 में भारत लौटा था। उसने एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा तीन बार दी, लेकिन सफल नहीं हो सका। आरोप है कि इसके बाद उसने शुभम गुर्जर के माध्यम से करीब 25 लाख रुपये में फर्जी एफएमजी प्रमाणपत्र बनवाया और उसके आधार पर राजकीय मेडिकल कॉलेज करौली में इंटर्नशिप की। पुलिस के अनुसार वह वर्तमान में एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा की तैयारी कर रहा था।

गिरफ्तार नंबर 2.

खबरों की अविरल धारा

दूसरे आरोपी राजेंद्र कुमार यादव ने चीन से वर्ष 2006 से 2012 के बीच एमबीबीएस किया और 2012 में भारत लौटा। उसने एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा आठ बार दी, लेकिन सफल नहीं हुआ। आरोप है कि उसने करीब 29 लाख रुपये देकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के लिए आवेदन किया। वर्तमान में वह अपनी डॉक्टर पत्नी के अस्पताल में मैनेजमेंट का काम देख रहा था।

गिरफ्तार नंबर 3.

तीसरे आरोपी नरेश रोलानिया ने भी कजाकिस्तान से 2021 में एमबीबीएस किया था। वह एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा तीन बार देने के बावजूद पास नहीं हो सका। पुलिस के अनुसार उसके रिश्तेदार नरेन्द्र ने करीब 26 लाख रुपये में फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया, जिसके आधार पर उसने उदयपुर मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप की। आरोप है कि वह बिना एफएमजी परीक्षा पास किए और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के बिना कोटपूतली स्थित अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों का इलाज कर रहा था।

14 अगस्त 2026 तक की हिरासत

पुलिस ने तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर 14 अगस्त 2026 तक की हिरासत प्राप्त की है। अब एसओजी आरोपियों से पूछताछ कर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने वाले नेटवर्क, बिचौलियों और पंजीयन प्रक्रिया में कथित मिलीभगत करने वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपये में फर्जी प्रमाणपत्र

पुलिस के अनुसार इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए लोगों में फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने वाला मुख्य आरोपी भानाराम माली, उसके सहयोगी शुभम गुर्जर और इंद्रराज गुर्जर सहित अन्य लोग शामिल हैं। आरोप है कि फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने के लिए प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपये तक लिए जाते थे। एसओजी की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है

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