Saturday, 1 August 2026

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पाकिस्तान में पानी-पानी का संकट! सिंध-बलूचिस्तान में सूख रहीं नहरें

सिंधु जल संधि विवाद के बीच पाकिस्तान में गहराया जल संकट

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पाकिस्तान में जल संकट ने बढ़ाई चिंता

IndusWaterTreatyरू पाकिस्तान में पानी की हर बूंद अब सोने के बराबर कीमती होती जा रही है। सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बीच पड़ोसी देश के कई हिस्सों में जल संकट गहराता जा रहा है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में नहरें सूखने की कगार पर हैं, खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं और करोड़ों लोगों के सामने पानी का संकट खड़ा हो गया है। (IndusWaterTreaty) हालात इतने गंभीर बताए जा रहे हैं कि पाकिस्तान की करीब एक-तिहाई आबादी किसी न किसी रूप में जल कमी का सामना कर रही है। सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है, जहां किसानों को फसलों के बर्बाद होने और भारी आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है।

जानिए क्यों रोकी गई सिंधु जल संधि?

दरअसल, भारत ने साल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला किया था. इसके बाद दोनों देशों के बीच जल संसाधनों को लेकर विवाद और गहरा गया. भारत सरकार लगातार ये कहती रही है कि आतंकवाद को समर्थन देने वाले देश को पानी नहीं दिया जाएगा. हाल ही में केंद्रीय नेतृत्व ने भी इस मुद्दे पर सख्त रुख दोहराया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ किया कि भारत का अपना रुख नरम करने का कोई इरादा नहीं है. उन्होंने कहा कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को रोकते हुए भारत ने कहा कि जिनकी आंखों के आंसू सूख चुके हैं, उन्हें पानी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि भारत अपनी सिंधु का पानी आतंकवादियों के संरक्षकों और मानवता के दुश्मनों तक नहीं पहुंचने देगा.

पाक में और बिगड़ेंगे हालात?

आपको बता दें कि सिंधु जल संधि साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी. ये समझौता दशकों तक दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार बना रहा. हालांकि हाल के वर्षों में बढ़ते तनाव और सुरक्षा मुद्दों की वजह से ये संधि फिर चर्चा में आ गई है. फिलहाल, पाकिस्तान में जारी जल संकट की वजह से राजनीतिक विवाद भी बढ़ गया है. अलग-अगल राजनीतिक दल एक-दूसरे पर हालात बिगाड़ने का आरोप लगा रहे हैं. जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हाफिज नईम-उर-रहमान ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की अगुवाई वाली सिंध सरकार पर आरोप लगाया है कि वो सालों तक सत्ता में रहने के बावजूद कराची में पानी की पुरानी किल्लत को दूर करने में नाकाम रही है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है और ऐसे में जल संकट कृषि उत्पादन को और कमजोर कर सकता है. इससे खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार पर भी असर पड़ने की आशंका है.

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