Tuesday, 15 September 2026

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लाेकजात यात्रा पर निकली मां नंदा देवी की डोली पहुंची जयपुर

“जै-जै बोला जै भगोती नन्दा, नन्दा ऊँचा कैलासो की जै…” के जयघोष की गूंज, जयपुर में गढवाल सभा का आयोजन

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मां नंदा देवी की लोकजात यात्रा

“जै-जै बोला जै भगोती नन्दा, नन्दा ऊँचा कैलासो की जै…” के जयघोष, पारम्परिक लोकगीतों की मधुर धुन और पहाड़ी परिधानों से सजे श्रद्धालुओं के बीच बुधवार को जयपुर भक्तिमय हो उठा। अवसर था उत्तराखण्ड की आराध्य देवी माँ नन्दा देवी की प्रवास एवं प्रचार-प्रसार यात्रा के जयपुर आगमन पर गढ़वाल सभा जयपुर द्वारा आयोजित भव्य स्वागत समारोह का।

माँ नन्दा की डोली के जयपुर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा एवं जयघोष के साथ भव्य स्वागत किया। कलश यात्रा एवं शोभायात्रा में हजारों श्रद्धालु पारम्परिक वेशभूषा में शामिल हुए। महिलाएं सिर पर कलश धारण कर लोकगीत गाते हुए चल रही थीं, वहीं पुरुष एवं युवा ढोल-दमाऊं और पारम्परिक लोकधुनों पर झूमते नजर आए। पूरे मार्ग में “माँ नन्दा की जय” के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा।

गढ़वाल सभा जयपुर के अध्यक्ष जी. पी. कुकरेती ने बताया कि माँ नन्दा की यह प्रचार-प्रसार यात्रा भारत भ्रमण के दौरान महाराष्ट्र, गुजरात, जोधपुर एवं अजमेर होते हुए जयपुर पहुंची है। गढ़वाल सभा जयपुर द्वारा प्रत्येक वर्ष माँ नन्दा की डोली का श्रद्धा एवं भक्ति भाव से स्वागत किया जाता है। उन्होंने बताया कि कलश यात्रा एवं शोभायात्रा के पश्चात हजारों श्रद्धालुओं ने माँ नन्दा की विशेष पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर पवित्र महायज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें 101 जोड़ों ने विधिवत यज्ञ में आहुति दी। इसके बाद माँ नन्दा की महाआरती एवं प्रसादी का आयोजन हुआ।

माँ नन्दा को सम्पूर्ण उत्तराखण्ड में बहन और बेटी के रूप में माना जाता है। हिमालय पुत्री माँ नन्दा का भगवान भोलेनाथ के साथ विवाह होने के बाद अपनी ससुराल कैलाश जाने की परम्परा को ही उत्तराखण्ड में नन्दा देवी लोकजात एवं बड़ीजात यात्रा के रूप में मनाया जाता है। यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति, परम्पराओं और भावनात्मक रिश्तों का जीवंत प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि जब माँ नन्दा को कैलाश के लिए विदा किया गया तो जयपुर में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं। ऐसा लगा मानो पूरा उत्तराखण्ड अपनी बेटी को उसके ससुराल विदा कर रहा हो। लोकगीतों और जागरों के बीच श्रद्धालु भाव-विभोर होकर माँ नन्दा से सुख-समृद्धि एवं परिवारों की खुशहाली का आशीर्वाद मांगते रहे।

कार्यक्रम के संयोजक सुखदेव ढोंडियाल ने कहा कि माँ नन्दा के जयपुर आगमन से पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। श्रद्धालु लोकगीत गाते, झूमते और नृत्य करते हुए माँ नन्दा की भक्ति में लीन दिखाई दिए। वहीं कैलाश विदाई के समय अनेक श्रद्धालु भावुक होकर रो पड़े। उन्होंने कहा कि माँ नन्दा के प्रति लोगों की आस्था और भावनात्मक जुड़ाव ही इस यात्रा की सबसे बड़ी शक्ति है।

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जयपुर में भव्य स्वागत एवं पूजा-अर्चना के पश्चात माँ नन्दा की यात्रा अगले पड़ाव आगरा के रवाना होगी।

माँ नन्दा के जयघोष से जयपुर गूंजता रहा-“जै-जै बोला जै भगोती नन्दा, नन्दा ऊँचा कैलासो की जै!”



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