Tuesday, 15 September 2026

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चांदी की पालकी में नगर भ्रमण पर निकले 'महाकाल'

सावन के अंतिम सोमवार पर निकली महाकाल की भव्य सवारी, चार दिव्य स्वरूपों में दिए दर्शन

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महाकाल की सवारी

सावन के अंतिम सोमवार पर उज्जैन में बाबा महाकाल की भव्य और परंपरागत सवारी निकाली गई। बाबा महाकाल चांदी की पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकले। सवारी के दर्शन के लिए उज्जैन सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। हर-हर महादेव और बाबा महाकाल के जयकारों से पूरा शहर शिवमय नजर आया।

उमड़ा भक्तों का सैलाब

महाकाल मंदिर के पट रात करीब ढाई बजे खोले गए। इसके बाद बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगनी शुरू हो गईं। सुबह होते-होते मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की भारी भीड़ नजर आई। श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े रहकर बाबा महाकाल के दर्शन करते रहे।

पूजन-अर्चन के बाद शाम करीब 4 बजे बाबा महाकाल की सवारी मंदिर से नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई। सवारी के निकलते ही श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव और बाबा महाकाल के जयकारे लगाए। ढोल-नगाड़ों और भजन मंडलियों की प्रस्तुतियों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।

चार दिव्य स्वरूपों में हुए बाबा महाकाल के दर्शन

सावन की अंतिम सवारी में बाबा महाकाल ने चार अलग-अलग स्वरूपों में श्रद्धालुओं को दर्शन दिए।

1. चंद्रमोलेश्वर स्वरूप – चांदी की पालकी में

2. मनमहेश स्वरूप – हाथी पर

3. शिव तांडव स्वरूप – गरुड़ पर

4. उमा-महेश स्वरूप – नंदी रथ पर

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इन चारों स्वरूपों के दर्शन के लिए सवारी मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

मुख्य द्वार पर दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर

सवारी की शुरुआत श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभा मंडप से पूजा-अर्चना के बाद हुई। मंदिर के मुख्य द्वार पर बाबा महाकाल को सशस्त्र पुलिस बल की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद सवारी निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ी। सवारी गुदरी चौराहा, पटनी बाजार, कहारवाड़ी, रामघाट, रामानुजकोट, कार्तिक चौक, छत्री चौक और गोपाल मंदिर होते हुए वापस श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची।

जगह-जगह हुई पुष्पवर्षा, जयकारों से गूंजा उज्जैन

बाबा महाकाल की सवारी के स्वागत के लिए मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालु मौजूद रहे। भक्तों ने बाबा की पालकी पर पुष्पवर्षा की और जयकारे लगाए। भजन मंडलियों की प्रस्तुतियों और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए।

मंदिर पुजारी महेश पुजारी के अनुसार, सावन का महीना भगवान महाकाल की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सावन में बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलते हैं। सवारी के दर्शन को श्रद्धालु अत्यंत पुण्यकारी मानते हैं।

11 हजार पौधे बांटकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

सावन की चतुर्थ सवारी के अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के तहत श्रद्धालुओं और आमजन को पौधारोपण के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से 11 हजार पौधों का वितरण किया गया। इसके जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

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