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कोई किसी के भाई-भतीजों को चोर बता रहा तो कोई किसी के रिश्तेदारों को, कोई अपने आसपास वालों को ही बता रहा नाकारा
राजस्थान में एक दूसरे की कुर्सी खींचने के चक्कर में नेताओं के चमचे अपना रहे गलत हथकंडे
जयपुर।
राजस्थान सरकार के दो वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इससे पहले राजननीतिक गलियारों में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं गरम है। इस बीच एक दूसरे की कुर्सी खींचने के चक्कर में कुछ नेताओं ने हथकंडे अपनाना शुरु कर दिया है। कोई किसी के पुराने विवाद सामने ला रहा है तो कोई आरोप प्रत्यारोप लगा है।
मंत्री बनने के चक्कर में अजमेर की महिला नेता
अजमेर की एक महिला नेता ने तो विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के सामने ही बिफर गई। कहा- पूरा सिस्टम जंग खा गया है। सरकारी विभागों में धक्का मारे बिना कोई काम नहीं होता है। इसके लिए नेता को हर स्तर पर जूझना पड़ता है। चर्चा है कि इनको भी मंत्री बनने की अभिलाषा है। ये मंत्री नहीं है तब नाक के दम किए रहती हैं, तो मंत्री बन गई तो सिस्टम हिला देंगी।
मंत्री के भजीते बताने वालों पर माल कूटने के आरोप
प्रदेश के एक राज्य मंत्री की कुछ लोग कुर्सी खींचने के लिए कारस्तानी कर रहे हैं। हाल ही में जीतू गुर्जर और चपराणा का नाम लेकर अनिल मीणा नामके एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर दहाड़े मार मार कर मंत्री के नाम पर उगाही करने के आरोप लगाए। कुछ दूसरे नेताओं के शार्गिदों ने इन्हें तुरंत हवा दी। इस बीच आरोप लगाने वाले का दूसरा वीडियो आया। वह पलट गया। बोला जीतू से मेरा जो लेन-देन का वह सैटल हो गया। मतलब आप समझ ही गए होंगे।
अफवाह फैला दी कि विभाग की समझ ही नहीं
राजस्थान सरकार के एक मंत्री के साथ तो उनके विभाग के अफसरों से ही खेल करा दिया गया। अफवाह फैला दी कि उनको विभाग के बारे में कुछ समझ नहीं है। मंत्रीजी ही टेंशन में आ गए। मंत्री जी ने पिछले दिनों विभाग में अपने करीबी और रिश्तेदारों को पोस्टिंग दिलाई है, ताकि उनके खिलाफ अफवाहों को ठंडा किया जा सके। जबकि मंत्री बड़े राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखते हैं, उनकी पॉलिटिकल समझ में कोई कमी नहीं है, विभाग तो अफसरों को समझना चाहिए, मंत्री जी का इससे क्या लेना देना। उन्हें अफसर समझाएं।
अपने नेता को मंत्री बनवाने के चक्कर में चमचे
दरअसल इस खेल में पीछे कुछ अफसर तो कुछ विधायकों के चमचे काम कर रहे हैं। अफसर अपने करीबी को मंत्रा बनवाने के चक्कर में षडयंत्र की बीज बोने का आइडिया देकर अफवाहो का बाजार गरम करवा देते हैं। नेताओ के चमचे उन अफवाहाें को सोशल मीडिया पर वायरल कर देते हैं, लेकिन शायद उनको पता नहीं कि ये भाजपा की सरकार है, टॉप से लेकर बॉटम तक पूरी जांच पड़ताल के बाद ही मंत्री बनते और हटते हैं। फिलहाल देखिए, आगे आगे होता है क्या?
पहले भी होती रहीं है साजिशें
राजस्थान की भाजपा सरकार में सीएम से लेकर डिप्टी सीएम और कैबिनेट में अधिकतर नए चेहरो को मौका मिला है। ये दिन रात परफाॅर्मेंस दिखाने में जुटे रहते हैं, लेकिन कुछ विरोधी ताकते उन्हें कमजोर करने के लिए षडयंत्र रचती रहती है। कई बार सीएम ही बदलने की तैयारी की तैयारी की अफवाहें उड़ा चुके हैं। दोनों डिप्टी सीएम के खिलाफ भी कई बार सोशल मीडिया को हथियार बनाकर छवि खराब करने की साजिशें रची जा चुकी है। महिला उपमुख्यमंत्री का दिया बुझाने के लिए तो जयपुर से मध्यप्रदेश तक खेल चला, इस सबके पीछे असली 'सूत्र' धार कौन था, यह तो साफ नहीं हो पाया, लेकिन षडयंत्र अभी भी जारी हैं।
(राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं के आधार पर)