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अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हस्ताक्षर का इंतजार
रूस के तेल खरीदारों पर एक्शन हो सकता है
अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की अनुमति देने वाला विधेयक पारित कर दिया है। इससे भारत सहित कई देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगने की आशंका बढ़ गई है। यह बिल पहले ही अमेरिकी सीनेट से मंजूरी प्राप्त कर चुका है और अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हस्ताक्षर के बाद कानून बन सकता है।
इस कानून को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ नाम दिया गया है। इसमें राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है। अमेरिकी सूची में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देश शामिल बताए गए हैं। यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद भारत ने रूस से सस्ते कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है और वर्तमान में देश की कुल जरूरत का 40% से अधिक तेल रूस से आता है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि 100% टैरिफ लागू होता है तो अमेरिका में भारतीय उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इसका असर टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग सामान, लेदर, केमिकल और समुद्री उत्पादों के निर्यात पर पड़ सकता है। हालांकि, टैरिफ लागू करने का अंतिम फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में होगा।
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