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पीपल्दा गांव दो धड़ों में बंट गया, तनाव और बवाल की आशंका के चलते प्रशासन ने पहुंच कर रूकवाया मंदिर का काम
पीपल्दा गांव में पुलिस-प्रशासन और ग्रामीणों के बीच लंबी बातचीत चली
बौंली (सवाई माधोपुर)।
सवाई माधोपुर की बौंली तहसील के पीपल्दा गांव के पुराने मंदिर के पुनर्निमाण को लेकर चल रहे विवाद ने रविवार को तूल पकड़ लिया। कई दिनों से विरोध कर रहे लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। गांव में ही लोगों ने धरना देकर नारेबाजी की दी। प्रशासन काे मौके पर आना पडा। पीपल्दा का रघुनाथ मंदिर इन दिनों अखाड़ा बना हुआ है। एक तरफ पूर्बिया समाज के लोग हैं दूसरी तरफ पूरा गांव। पूर्बिया समाज के कुछ युवाओं ने जर्जर मंदिर को तोड़कर वहां नया मंदिर बनाने की जिद पकड़े हुए हैं, दूसरी तरफ गांव वालों का कहना है कि मंदिर सर्व समाज का है। कोई एक समाज इसे अपना बताकर तोड़फोड़ और नया निर्माण कैसे कर सकता है। मंदिर की पौराणिक मूर्तियां भी गायब कर दी गई हैं। कई दिनों से मामला सुलग रहा था। ग्रामीण इस मामले को लेकर कई दौर की बैठक कर चुके। समाधान नहीं निकल पा रहा। इसको लेकर गांव में रविवार का देकर विराेध उग्र हो गया।
मंदिर की आड में दुकानें बनाकर कब्जा करने का आराेप हैं।
मामला ग्राम पंचायत पीपल्दा, बौंली मुख्य बाजार में स्थित रघुनाथ जी के मंदिर का है। यह संवत 1789 में निर्मित बताया जाता है। मंदिर मुख्य बाजार में है, इसके आसपास भी मंदिर की काफी जमीन है। साथ ही मंदिर माफी की कुछ जमीन भी मंदिर के नाम है। ऐसे में अब इस मंदिर के जीर्णोद्धार के नाम पर तोड़फोड़ कर नया मंदिर बनाने और बाहर की तरफ मुख्य रोड पर 15 से 20 दुकानों का निर्माण किया जा रहा है। ग्रामीणों ने पुलिस कंप्लेन कर दी। पुलिस ने काम रूकवा दिया, लेकिन फिर से काम शुरु कर दिया गया।
दोनों पक्षों के एक दूसरे पर आरोप हैं।
इस मामले में ग्रामीणों में सर्व समाज की तरफ से विरोध का नेतृत्व कर रहे मुकेश अग्रवाल का कहना है कि मंदिर ऐतिहासिक है, पूरे गांव का इस पर अधिकार है, ऐसे में पूरे गांव की सहमति बिना तोड़फोड़ कर एक समाज के लोगों द्वारा मनमर्जी का विराेध किया जा रहा है। दूसरी तरफ इस मंदिर को लेकर पूर्बिया समाज का कहना है कि मंदिर उनके समाज का पूजा स्थल है, परिसर जर्जर हो चुका था। इसलिए पुनर्निमाण कराया जा रहा है। लोगों को इसका विरोध नहीं करना चाहिए।
पुलिस प्रशासन ने पहुंचकर काम रूकवा दिया।
रविवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गए। पुलिस प्रशासन को मौके पर आना पड़ा। काफी देर तक समझाइस का दौर चला। गांव वाले किसी भी कीमत पर मंदिर की संपत्ति पर एक पक्ष का कब्जा और दुकानें बनाकर उन्हें एक समाज के लोगों को देने जैसे कई आरोप लगाए। मंदिर के पुनर्निमाण कार्य पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। जल्द इस मामले में प्रशासन के हस्तक्षेप से कोई रास्ता निकाला जाएगा।