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राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म 'चलो जीते हैं' जोधपुर और अजमेर सहित कई शहरों में निशुल्क स्क्रीनिंग
देशभर में लाखों स्कूली छात्रों और आम दर्शकों के बीच पहुंच रही स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक दर्शन पर बनीं चर्चित फिल्म
जोधपुर/अजमेर। स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक दर्शन "बस वही जीते हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं" पर आधारित राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म "चलो जीते हैं" देशभर में लाखों स्कूली छात्रों और आम दर्शकों के बीच पहुंच रही है। यह विशेष प्रदर्शन 17 सितंबर से 2 अक्टूबर, 2025 तक देश के लगभग 500 सिनेमाघरों और अनगिनत स्कूलों में आयोजित किया जा रहा है।
इसी पहल के तहत, राजस्थान के विभिन्न शहरों में भी इस फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग की जा रही है ताकि अधिक से अधिक लोग इस संदेश से जुड़ सकें। जोधपुर में, फिल्म का प्रदर्शन सिनेप्लेक्स थिएटर में हो रहा है, जहाँ दर्शक इस प्रेरणादायक कहानी को बड़े पर्दे पर देख सकते हैं।
वहीं, अजमेर के निवासियों के लिए यह फिल्म बिल्कुल निशुल्क उपलब्ध है। शहर के दो प्रमुख सिनेमाघरों, मित्तल मॉल और सिटी स्क्वायर मॉल के इनॉक्स सिनेमा में इसका प्रतिदिन प्रदर्शन किया जा रहा है। यह पहल सुनिश्चित करती है कि समाज के हर वर्ग के लोग बिना किसी शुल्क के इस महत्वपूर्ण फिल्म को देख सकें।
'चलो जीते हैं' फिल्म एक गहरी मानवीय कहानी है जो हमें दूसरों की मदद करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के महत्व को समझाती है। राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित यह फिल्म न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि दर्शकों को जीवन में एक सार्थक उद्देश्य खोजने के लिए भी प्रेरित करती है। इस फिल्म का प्रदर्शन छात्रों और युवाओं को विशेष रूप से प्रेरित करेगा। यह उन्हें निस्वार्थ सेवा और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने में मदद करेगा। स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को इस प्रेरणादायी लघु फिल्म को दो अक्टूबर तक दिखाया जाए। करीब आधे घंटे की इस लघु फिल्म को 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में पारिवारिक मूल्यों पर आधारित सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था।
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