Saturday, 1 August 2026

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पाकिस्तान का अफगान बॉर्डर पर ऑपरेशन, 29 लड़ाकों की मौत

पाकिस्तान का बॉर्डर ऑपरेशन बना बड़ा विवाद

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बढ़ा तनाव

दक्षिण एशिया के सबसे अशांत बॉर्डर पर एक बार फिर बारूद की गूंज सुनाई दे रही है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर पाकिस्तानी सेना ने एक बेहद आक्रामक और बड़ा जमीनी ऑपरेशन (Ground Operation) चलाया है। इस खूनी सैन्य कार्रवाई में कम से कम 29 लड़ाकों के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि हुई है। यह सैन्य कार्रवाई उस वक्त की गई जब इसके ठीक एक दिन पहले बंदूक और आत्मघाती विस्फोटकों से लैस उग्रवादियों ने पाकिस्तान के दक्षिणी बंदरगाह शहर कराची में पैरामिलिट्री रेंजर्स के रीजनल हेडक्वार्टर पर एक दुस्साहसिक हमला कर दिया था, जिसमें तीन पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। कराची के लहू का हिसाब चुकता करने के लिए सेना ने कुछ ही घंटों के भीतर अफगान सीमा पर "सोच-समझकर विनाशकारी हमले" शुरू कर दिए।

 आधी रात को उग्रवादियों के ठिकानों पर कहर

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस गुप्त मिलिट्री ऑपरेशन की जानकारी साझा करते हुए पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि यह कड़ा कदम देश भर में सुरक्षा बलों पर हुए सिलसिलेवार हमलों का करारा जवाब है।

खुफिया इनपुट और सटीक निशाना

 इस जमीनी और हवाई साझा ऑपरेशन में विशेष रूप से 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (TTP) के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले बंकरों और पनाहगाहों को निशाना बनाया गया। अचानक हुए इस हमले से सीमा पार छिपे उग्रवादियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और देखते ही देखते 29 आतंकवादी ढेर कर दिए गए। हालांकि, इस भारी बमबारी और गोलीबारी के बाद अफगानिस्तान के काबुल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे सस्पेंस और गहरा गया है।

कराची हमले का वो 'घायल सुराग' जिसने खोल दिए सारे राज!

कराची में पैरामिलिट्री हेडक्वार्टर पर हुए हमले ने पाकिस्तान के खुफिया तंत्र को हिलाकर रख दिया था। उस मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने तीन हमलावरों को मार गिराया था, लेकिन चौथे हमलावर को घायल हालत में जिंदा गिरफ्तार कर लिया गया। सेना द्वारा की गई शुरुआती पूछताछ में जो खुलासा हुआ, उसने दोनों देशों के बीच आग में घी का काम किया।पकड़ा गया वह आतंकवादी एक अफगान नागरिक निकला। इसके तुरंत बाद, पाकिस्तानी तालिबान से अलग हुए एक बेहद खूंखार गुट 'जमात-उल-अहरार' ने इस आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी ले ली। इस 'अफगान कनेक्शन' के उजागर होते ही पाकिस्तानी सेना के कमांडिंग अफसरों ने बिना वक्त गंवाए सीमा पर टैंक और जमीनी टुकड़ियों को आगे बढ़ने का 'ग्रीन सिग्नल' दे दिया।

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