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देश की नामचीन सीमेंट कंपनियों के बड़े-बडे़ दावों से जुड़े वाद की सुनवाई पांच साल तक किसने रोकी?
कहीं पब्लिक की आंखों में सीमेंट तो नहीं झोंक रही नामचीन कंपनियां
देश की नामचीन सीमेंट कंपनियों द्वारा अपने प्रोडेक्टस बेचने के लिए जो जो बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं वे कितने सही हैं, इसको लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सीमेंट कंपनियों के दावे जैसे ‘जंग रोधी, मौसम रोधी, नमी रोधी’ को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने गलत माना। इन कंपनियों के खिलाफ BIS एक्शन लेता उससे पहले ही सीमेंट कंपनियां कोर्ट चली गई। मामला लिटिगेशन में आ गया। जिससे एक तरफ तो BIS के एक्शन पर ब्रेक लग गया, दूसरी तरफ राजस्थान हाईकोर्ट में मामले की पांच वर्ष तक लिस्टिंग ही नहीं हुई। या यूं कहें, इस केसे में ‘न्याय का तराजू’ झुका ही पड़ा रहा। पांच वर्ष बाद जाकर हाल ही केस लगा तो गैप पीरियड देखकर जज साहब भी हैरान रह गए। उन्होंने सभी पक्षकारों को तलब करते हुए न्यायिक रजिस्ट्रार को निर्देश दिए कि यह देरी किस वजह से हुई, कौन जिम्मेदार है, बताएं। हालांकि अगली सुनवाई होती उससे पहले जज साहब की लाेकेशन बदल गई। ये गंभीर मामला फिर पेंडिंग ही रह गया।
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के उल्लंघन का मामला
यह मामला देश की नामचीन सीमेंट कंपनियां से जुड़ा है। इन कंपनियाें पर भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगे थे। किसी कंपनी ने सीमेंट में ‘जान’ तो कोई ‘जंग रोधी’ जैसे नाम से ट्रेडमार्क रजिस्टर करा रखे हैं। इनको BIS ने नियम कायदों का उल्लंघन माना। उल्लंघन पर कंपनियों पर उनकी ब्रिकी के 10 गुना तक पैनल्टी का प्रावधान है। बार-बार उल्लंघन पर 5 वर्ष तक जेल भी हो सकती है। एक सीमेंट कंपनी के खिलाफ शिकायत हुई तो भारतीय मानक ब्यूरो ने कार्रवाई की तैयारी शुरु कर दी थी। सीमेंट वालों को इसका पता चला तो अधिकतर कंपनियां बीआईएस के खिलाफ होईकोर्ट पहुंच गई। देश की नामचीन सीमेंट कंपनियाें ने बीआईएस के खिलाफ कोर्ट केस कर दिया। लेकिन करीब पांच वर्ष से इन केसेज की सुनवाई ही नहीं हुई।
लिटिगेशन में फंसाकर अटकाने की मंशा तो नहीं!
आशंक है कि मामले को लिटिगेशन में फंसाकर अटकाने की मंशा से ये केस किए गए होंगे। हाल ही में यह मामला जयपुर हाईकोर्ट के एक ऐसे जज के सामने सुनवाई के लिए आ गया, जिनकी छवि बेहद सख्त और कानून सम्मत काम करने के साथ ही समयबद्धता के लिए पहचानी जाती है। जज साहब ने मामले को देखा तो वे हैरान रह गए। वर्ष 2021 में सीमेंट कंपनियों से जुड़े सभी मामलों को कंपाइल करते हुए सुनवाई के लिए लिखा होने के बावजूद उसके बाद लिस्टिंग नहीं होने से वे नाराज हुए। उन्होंने न्यायिक रजिस्ट्रार को लिखा कि इतने लंबे समय तक लिस्टिंग क्यों नहीं हुई। फिर केस की सुनवाई के लिए 8 जुलाई 2026 की डेट तय कर दी थी। हालांकि अगली सुनवाई से पहले वे जोधपुर चले गए।
ऐसे शुरुआत हुई थी इस मामले की
गलाकाट प्रतिस्पर्धा और बाजारवाद के चलते भारत में सीमेंट कंपनियां अपना माल बेचने के लिए बे सिर-पैर के बड़े-बड़े दावे करती आई हैं। सन 2020 में एक सीमेंट कंपनी के मौसम से जुड़े विज्ञापन की शिकायत पर ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड ने एक सर्कुलर निकाला और स्वीकार किया कि बहुत सी सीमेंट कंपनिया भ्रामक क्लेम कर रही है जिन्हें कोई भी भारतीय मानक सपोर्ट नहीं करता है। उस सर्कुलर के खिलाफ कुछ कंपनिया यह कहकर कोर्ट में चली गई थी कि ये हमारे रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क है।
सीमेंट कंपनियों के विवादित दावे, जो फंस गए
देश की कई नामचीन सीमेंट कंपनियों के दावों को भारतीय मानक ब्यूरो ने नियमों का उल्लंघन माना। सीमेंट कंपनियों के अलग-अलग दावों जैसे ‘‘जंग रोधी, मौसम रोधी, नमी रोधी’ जैसे कई ट्रेडमार्क को गलत माना गया था। ऐसे-ऐसे दावे किए जा रहे हैं, जो हो नहीं सकते या फिर भारतीय मानक ब्यूरो इसकी अनुमति नहीं देता। बीआईएस सूत्रों के मुताबिक ये सब दावे बकवास है, जनता को बेवकूफ बनाकर प्रोडक्ट बेचने के हथकंडे हैं। जिसके खिलाफ सीमेंट कंपनियां लिटिगेशन में चली गई।
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