Thursday, 16 April 2026

Home / Bharat /

national-level-summi...

'मरुधरा की प्यास' बुझा सकता है हिमालय की नदियों का बाढ़ में बह जाने वाला पानी

जल संकट के खिलाफ 'ग्राउंडवॉटर स्ट्रैटेजी समिट 2025' में ठोस कार्ययोजना पर चर्चा

News Image

जयपुर में 'ग्राउंड वॉटर स्ट्रैटेजी समिट 2025' में ठोस कार्ययोजना पर चर्चा

जयपुर। 

देश और प्रदेश में लगातार गिर रहे जलस्तर को रोकने औैर जल संरक्षण, जल सुरक्षा के साथ ही सबको पानी मिले, इसको लेकर शनिवार को राजधानी के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में 'ग्राउंडवॉटर स्ट्रैटेजी समिट 2025' संपन्न हुई। इसमें ​देशभर से आए विशेषज्ञों ने भूजल स्तर पर चिंता जताते हुए जल संरक्षण के लिए महत्त्वपूर्ण सुझाव दिए। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि हिमालय का पानी जो बाढ के रूप में बहता है उसे राजस्थान सहित देश के कम पानी वाले क्षेत्रों में पहुंचाकर जन जन की प्यास बुझा सकती है। 

समि​ट के आयोजक डॉ एस. के.जैैन ने बताया कि इस समिट में मिले सुझाव और प्रस्तावों की रिपोर्ट तैयार कर केन्द्र व राज्य सरकार को सौंपी जाएगी ताकि इसके सार्थक परिणाम सामने आ सके।

देश और प्रदेश में लगातार गिर रहे जलस्तर को रोकने औैर जल संरक्षण, जल सुरक्षा के साथ ही सबको पानी मिले, इसको लेकर शनिवार को राजधानी के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में 'ग्राउंडवॉटर स्ट्रैटेजी समिट 2025' संपन्न हुई। इसमें ​देशभर से आए विशेषज्ञों ने भूजल स्तर पर चिंता जताते हुए जल संरक्षण के लिए महत्त्वपूर्ण सुझाव दिए। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि हिमालय का पानी जो बाढ के रूप में बहता है उसे राजस्थान सहित देश के कम पानी वाले क्षेत्रों में पहुंचाकर जन जन की प्यास बुझा सकती है। समि​ट के आयोजक डॉ. एस. के.जैैन ने बताया कि इस समिट में मिले सुझाव और प्रस्तावों की रिपोर्ट तैयार कर केन्द्र व राज्य सरकार को सौंपी जाएगी ताकि इसके सार्थक परिणाम सामने आ सकें। समिट में बडी बात सामने आई कि देश में कहीं भी वाटर मैनेजमेंट नहीं है, यह हो तो बाढ के रूप में बहने वाले अतिरिक्त पानी को कम पानी वाले क्षेत्रों में पहुंचाने की कार्ययोजना बनानी चाहिए। 

खबरों की अविरल धारा

इंस्टीट्यूट ऑफ वॉटर कंज़र्वेशन (IWC) द्वारा आयोजित और GWMICC द्वारा प्रायोजित इस समिट का शुभारंभ हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एन.के. जैन ने किया। इसमें देशभर के टॉप नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, जल योद्धा और इंडस्ट्री के दिग्गज जुटे। समिट के अलग अलग सत्रों में वक्तओं ने कहा कि राजस्थान में देश की 18% आबादी है, लेकिन जल संसाधन मात्र 4%! भूजल का बेलगाम शोषण जारी रहा तो आने वाली पीढ़ियां प्यासी रह जाएंगी। भूजल हमारी अर्थव्यवस्था और खेती की अदृश्य रीढ़ है, इसे अब बचाना होगा। समिट में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को हथियार बताया गया साथ ही चेतावनी दी गई कि सिर्फ सरकार के भरोसे संकट नहीं टलेगा। इंडस्ट्री को 'सर्कुलर इकोनॉमी' अपनानी होगी, हर बूंद पानी रिसाइकल करना पड़ेगा! आम जनता को 'हर वर्षा-बूंद रिचार्ज' के महाअभियान में कूदना होगा। समिट के कन्वीनर प्रो. हिमांशु जैन ने बताया कि राजस्थान को अब 'संकट का शिकार' नहीं, बल्कि 'समाधान की लैब' बनाया जाएगा। हिमालय से निकलने वाली नदियों में हर साल आने वाली बाढ़ का पानी अगर सही तरीके से मैनेज करके राजस्थान जैसे प्रदेशों तक पहुंचा दिया जाए तो यहां पानी का संकट ही दूर हो जाए। इस समिट में की-नोट एड्रेस भारत सरकार में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण के पूर्व चेयरमैन डॉ.सुशील गुप्ता का रहा। 

रोटरी इंटरनेशनल की डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रज्ञा मेहता बतौर स्पेशल गेस्ट शामिल हुई।

वाटर कंजर्वेशन सम्मेलन में आंकड़ों औैर तथ्यों से बताया गया कि जल संकट अब केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौती बन चुका है। राज्य के अधिकांश जिले अब 'ओवर-एक्सप्लॉइटेड' (अत्यधिक दोहन) की श्रेणी में आ चुके हैं। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने बताया कि जहाँ आबादी बढ़ रही है, वहीं भूजल का स्तर हर साल कई मीटर नीचे गिर रहा है। राजस्थान को एक 'लर्निंग लैब' मानते हुए यह सुझाव दिया गया कि यहां पारंपरिक जल संचयन (जैसे टांके और जोहड़) को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ना अनिवार्य है।

यह भी पढ़ें
×